कहा जाता है कि अंबाला के सीएनआई चर्च की स्थापना 1876 में अंग्रेजों ने की थी. यहां पर ब्रिटिश लोग प्रार्थना करके क्रिसमस का त्यौहार भी धूमधाम से मनाते थे. चर्च में आज भी पुरानी सभ्यता की अद्भुत कलाकृतियाँ और स्थापत्य कला देखी जा सकती है.
दरअसल, प्रभु यीशु मसीह के जन्म दिवस को लेकर इस बार भी अंबाला के सीएनआई चर्च में क्रिसमस धूमधाम के साथ मनाया जाएगा,ओर इसे लेकर ईसाई धर्म के लोगों के द्वारा तैयारीयां भी पुरी की जा रही है. सीएनआई चर्च को इस बार रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है ओर चर्च परिसर में ही चरणी (झोपड़ी) बनाई जा रही है.वही कल यानी 24 दिसंबर की रात को कैरल सांग आयोजित किए जाएंगे,ओर 25 दिसंबर की सुबह विशेष आराधना की जाएगी.
लोकल 18 से बातचीत में फादर रोशन पालॉस ने बताया कि वह चर्च परिसर में रह रहे हैं. क्रिसमस को लेकर वह लगभग 1 महीने पहले ही तैयारी में जुड़ जाते हैं. उन्होंने कहा कि अंबाला जिले में पांच सबसे ऐतिहासिक चर्च बने हुए हैं जहां पर ईसाई धर्म के लोग क्रिसमस पर प्रार्थना करते हैं. उन्होंने कहा कि 1876 में सीएनआई चर्च को अंग्रेजों ने बनाया था ओर लगभग 150 साल से भी ज्यादा पुराना यह चर्च बताया जाता है औऱ मौजूदा समय में यह चर्च दिल्ली के सीएनआई दिल्ली धर्म प्रांत के अधीन है. उन्होंने बताया कि पुराने समय में यह चर्च अंबाला छावनी की सहायक चर्च थी. उस दौरान छावनी में बनी सेंट पॉल चर्च में ब्रिटिश प्रार्थना करते थे और क्रिसमस का त्योहार मनाते थे.जबकि अब भारतीय मूल के ईसाई सीएनआई चर्च में प्रार्थना करते थे और क्रिसमस मनाते थे.
उन्होंने कहा कि सीएनआई चर्च परिसर में चरणी बनाई जा रही है. इस चरणी में झांकियों के माध्यम से प्रभु यीशु मसीह के जन्म को दिखाया जाएगा.यहां पर श्रद्धालु प्रभु यीशु मसीह की झांकियों के दर्शन कर कैंडल जलाएंगे. उन्होंने कहा कि 24 दिसंबर की रात 11 बजे चर्च कंपाउंड में रहने वाले ईसाई समुदाय के लोग अपने-अपने घरों से केक बनाकर लाएंगे. इसके बाद चर्च में प्रार्थना की जाएगी. इसके बाद रात 12 बजे प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिवस की खुशी मनाएंगे. उन्होंने बताया कि इस चर्च में क्रिसमस वाले दिन हर धर्म के लोग पहुंचते हैं और खुशी खुशी क्रिसमस के पर्व को सेलिब्रेट करते हैं.
अंबाला का इतिहासिक सेंट पॉल चर्च
अंबाला छावनी में स्थित सेंट पॉल चर्च का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है,ओर कहा जाता है कि यह चर्च करीब 163 सालों पुराना है. इसका निर्माण जनवरी 1857 में किया गया था. इस चर्च में ब्रिटिश काल में क्वीन विक्टोरिया की दूसरी बरसी पर भी विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ था. चर्च में 1857 की बाइबल भी मौजूद है. चर्च के पास ही इन दिनों एयरफोर्स स्कूल चलाया जा रहा है. यह चर्च आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) के रिकॉर्ड में मौजूद है. अहम बात है कि चर्च में भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू जहाजों ने बम गिराये थे और इस वजह से यह क्षतिग्रस्त हो गया है. बीते कई सालों से यह चर्च जर्जर हालत में है.
होली रिडीमर चर्च का इतिहास
अंबाला में स्थित होली रिडीमर चर्च अपने आप में इतिहास को समेटे है. ब्रिटिश काल में बना यह चर्च अंबाला का पहला चर्च माना जाता है, जो कि करीब 172 साल पुराना है. अंग्रेजों ने अंबाला कैंट को साल 1843 में अपनी छावनी बनाया था. यहां पर इटेलियन कैपूचिन वीनेंस, दिल्ली से आए थे ने अपनी सेवाएं दी. उनकी देखरेख में ही चर्च को बनाया गया, जो 1848 में बनकर तैयार हुई थी.
अंबाला शहर का सीएनआई चर्च
अंबाला शहर के कालका चौक के पास स्थित 150 साल पुराना सीएनआई (चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया) चर्च बताया जाता है. इस चर्च का निर्माण अंग्रेजों के समय में किया गया था, और इसके स्थापत्य से ही इसकी प्राचीनता का आभास होता है. खास बात यह है कि इस चर्च में आज भी पुरानी सभ्यता की अद्भुत कलाकृतियाँ और स्थापत्य कला देखी जा सकती है. विभाजन के बाद से इस चर्च का प्रबंधन भारतीयों द्वारा किया जा रहा. इस चर्च का निर्माण मिशनरी ने किया गया था.
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