Ambala Latest News : अंबाला के बराड़ा क्षेत्र के किसान राजीव ने गेहूं-धान की पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. सरकारी योजना के तहत नेट हाउस लगाकर शुरू की गई इस पहल से आज वे रोजाना हजारों रुपये कमा रहे हैं. हरियाणा के साथ पंजाब और हिमाचल में भी उनके फूलों की मांग बढ़ रही है.
परंपरागत खेती से बदलाव की शुरुआत
बराड़ा क्षेत्र निवासी किसान राजीव पहले अपनी तीन एकड़ जमीन पर गेहूं और धान की खेती करते थे. लेकिन फसल का उचित मूल्य न मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी. चार साल पहले उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी विभाग की मदद से फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया.
सरकारी योजना और नेट हाउस का सहारा
राजीव ने बताया कि उन्होंने बागवानी विभाग अंबाला से संपर्क कर तीन से चार दिन की ट्रेनिंग ली. इसके बाद सरकारी योजना के तहत अनुदान प्राप्त कर अपने खेत में नेट हाउस स्थापित किया. शुरुआत में उन्होंने गुलाब के फूलों की खेती शुरू की. धीरे-धीरे सरकार से अनुदान राशि मिलती रही, जिससे उन्होंने दो एकड़ में गेंदे और सफेद देंगी के फूल भी उगाने शुरू कर दिए.
मौसम के अनुसार विविध फूलों की खेती
राजीव अब मौसम के अनुसार अलग-अलग वैरायटी के फूल उगाते हैं. गुलाब की फसल एक बार लगाने पर दो से तीन साल तक उत्पादन देती है. इसमें नियमित कटिंग और खाद का विशेष ध्यान रखा जाता है. वहीं गेंदे की फसल लगभग दो महीने में तैयार हो जाती है और दो महीने तक लगातार फूल देती है. इसके बाद दूसरी किस्म लगाकर उत्पादन जारी रखा जाता है, जिससे सालभर आय बनी रहती है.
शादी और त्योहारों में बढ़ती मांग
राजीव ने बताया कि शादी के सीजन में गेंदे और गुलाब के फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है. वर्तमान में रोजाना 10 से 15 किलो फूल बाजार में बिक रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन 3 से 4 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर गेंदे के फूलों की विशेष मांग रहती है. मंदिरों की सजावट और विवाह समारोहों में भी उनके फूलों का उपयोग किया जाता है. आसपास के दुकानदार भारी मात्रा में उनसे फूल खरीदते हैं.
अनुदान से बढ़ा किसानों का उत्साह
फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार मैरी गोल्ड यानी गेंदे की खेती पर प्रति एकड़ 4600 रुपये का अनुदान दे रही है. इससे किसानों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है. राजीव का कहना है कि यह खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है, बशर्ते वे आधुनिक तकनीक और योजनाओं का सही लाभ उठाएं.
युवा किसानों के लिए प्रेरणा
राजीव ने युवाओं से अपील की है कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी ध्यान दें. उनका मानना है कि बदलते समय में नई तकनीक और विविध खेती अपनाकर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है. फूलों की खेती ने उनके जीवन में खुशबू और रंग दोनों भर दिए हैं, और अब वे आर्थिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.