अंबाला के भरत कुमार और वंदे मातरम् दल ने 500 से अधिक जुट की बोरी के बिस्तर बनाकर ठंड में बेजुबान जानवरों को राहत दी, 13 साल से पशु सेवा में सक्रिय हैं.
दरअसल अंबाला में बेजुबानों के लिए भी युवक भरत कुमार मसीहा बनकर आगे आए हैं. ठिठुरते बेजुबानों के लिए भरत कुमार ओर उनकी टीम ने जूट की बोरी की मदद से बिस्तर बनाकर जगह जगह पर बेजुबान जानवरों के लिए लगाए है, ताकि वह भी इन बढ़ते कोहरे ओर ठंड के बीच अपने आप को बचा सके.
लोकल-18 को भरत कुमार ने बताया कि लगभग आज से 13 साल पहले उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर वंदे मातरम् दल की शुरुआत की थी,जिसमें वह दुघटना में घायल, बीमार और असहाय पशु पक्षियों को प्राथमिक उपचार के साथ-साथ मेडिकल सुविधा देने का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब काफी ज्यादा ठंड बढ़ने लग गई है, जिसे लेकर वह पिछले लगभग 4 साल से हर बार सर्दी के मौसम में बेजुबान जानवर (डॉग्स) के लिए जुट की बोरी का बिस्तर तैयार करके उन्हें जगह जगह रखने का काम कर रहे हैं, ताकि जनवरी में कड़ाके की ठंड के बीच वह डॉग्स भी ठंड से अपना बचाव कर सके और वह किसी भी तरह से ठंड की चपेट में न आएं.
उन्होंने कहा कि इस खास तरह के बिस्तर में जुट की बोरी में वह पराली और गर्म कपड़े भरते है, जिससे उसमें गर्माहट बनी रहती है और वह जानवर को गर्मी देने का काम करता है. उन्होंने कहा कि इस बार लगभग करीब 500 बिस्तर के तैयार किए हैं, जिसमें अंबाला शहर में लगभग 300 के करीब बिस्तर गली मोहल्लों में निःशुल्क रूप से लगा दिए गए हैं.ऐसे में उनके हेल्पलाइन नंबर पर जहां से भी फोन आ रहा है, वह लोगों को जानवरों के लिए यह बिस्तर देने का काम कर रहे हैं. उन्होंने पशु प्रेमियों से अपील करते हुए कहा है कि वह उनके हेल्पलाइन नंबर 7027006644 पर कॉल करके यह खास तरह के बिस्तर निशुल्क रूप से प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् दल में उनके साथ लगभग 10 से 12 युवा साथी जुड़कर सेवा का काम कर रहे हैं. वह लोग दोपहर के समय नौकरी करते हैं और रात को बेजुबान जीव जंतुओं के लिए काम करते हैं.
भरत कुमार ने बताया कि सेवा कार्य की शुरुआत साल 2012 में एक घायल गाय की मदद से शुरू की थी. उस समय वे कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे ओर एक दिन वे अपने दोस्त के साथ अंबाला के अग्रसेन चौक से गुजर रहे थे, तभी रास्ते में एक घायल गौ माता मिली. इस दृश्य देखकर उनका मन विचलित हो उठे और फिर उन्होंने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया और अपने खर्च पर उस गाय का इलाज कराया. इसी सोच ने उन्हें जीव-जंतुओं की सेवा के रास्ते पर ला खड़ा किया. आज तक लगभग 5000 से अधिक घायल और बेसहारा जीव-जंतुओं का रेस्क्यू और इलाज कर चुके हैं ओर उनका संगठन “वंदे मातरम दल” अब अंबाला में पशु-सेवा का प्रतीक बन चुका है.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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