पाला लगने की पहली निशानी आलू के पत्तों का रंग बदलना है. सामान्य हरे पत्ते अचानक पीले दिखने लगते हैं, फिर धीरे–धीरे मुरझाकर झुकने लगते हैं. कई बार पूरी पत्ती रातोंरात काली पड़ जाती हैं. यह संकेत है कि पाले का हमला शुरू हो चुका है और पौधे का ऊपरी हिस्सा प्रभावित होने लगा है. यदि समय पर उपाय नहीं किया जाए, तो यह समस्या जड़ों और कंदों तक पहुंच सकती है, जिससे पैदावार पर भारी असर पड़ता है.
लगातार बादल रहने पर क्यों बढ़ जाता है जोखिम
लगातार बादल रहने, हवा बंद होने और तापमान 5 डिग्री के आसपास आने पर खेतों में नमी सतह पर जमने लगती है. इसी जमी नमी पर रात के समय तापमान और गिरने से पाला बनता है, जो पौधों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है. बादलों की वजह से दिन में धूप नहीं मिलती और पौधे अपनी ऊर्जा पुनः नहीं बना पाते. ऐसे में किसान भाई यदि सक्रिय न रहें, तो फसल को भारी नुकसान होना तय है.
समय रहते करें हल्की सिंचाई
पाले से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है-हल्की सिंचाई. खेत में हल्का पानी देने से तापमान थोड़ा बढ़ जाता है और पत्ता–स्तर पर नमी जमने से बच जाती है. इससे पाले की तीव्रता कम होती है और पौधे सुरक्षित रहते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि सिंचाई अत्यधिक न हो, केवल फसल को हल्की नमी देना ही पर्याप्त है. यह तरीका पाले के पहले संकेत दिखते ही तुरंत अपनाना चाहिए.
धुआं बनाकर दे सकते हैं अतिरिक्त सुरक्षा
आलू के खेत के आसपास रात के समय लकड़ी, पुआल या सूखे पत्ते जलाकर धुआँ करना भी काफी कारगर होता है. धुआँ खेत के ऊपर एक परत बना देता है, जिससे तापमान अचानक नीचे नहीं गिरता और पाला नहीं बन पाता. यह पारंपरिक किन्तु प्रभावी तकनीक आज भी किसान भाई बड़े क्षेत्रों में अपनाते हैं. विशेषकर ठंडी, बिना हवा वाली रातों में यह विधि फसल को काफी हद तक बचा सकती है.
दवा का इस्तेमाल कब और कैसे करें
यदि पाले का प्रकोप दिखाई देने लगे या उसकी आशंका हो, तो खेत में इंडोफिल एम-45 (M-45) का उपयोग लाभकारी माना जाता है. इसकी मात्रा 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करे. यह दवा पाले से प्रभावित कोशिकाओं को सड़ने से रोकती है और पौधों की सुरक्षा परत को मजबूत बनाती है. यदि प्रकोप गंभीर हो चुका है, तो 7 से 10 दिन बाद दोबारा छिड़काव जरूरी है.
समय पर उपाय ही फसल को बचा सकता है
आलू की फसल कम समय में तैयार होने वाली और संवेदनशील फसल है, इसलिए पाले की स्थिति में प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण होता है. यदि किसान समय रहते पत्तों की स्थिति पर निगरानी रखें और सिंचाई, धुआं और दवा का सही समय पर उपयोग करें, तो बड़े नुकसान से आसानी से बचा जा सकता है. सतर्कता और सही प्रबंधन ही इस मौसम में अच्छी पैदावार का सबसे बड़ा आधार है.
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