पहाड़ों में होली के समापन पर एक खास परंपरा निभाई जाती है. गांव के सभी लोग अपने-अपने घरों से थोड़ा-थोड़ा आटा, चावल, गुड़ या कुछ पैसे इकट्ठा करके मंदिर में देते हैं. यह योगदान छोटा या बड़ा नहीं देखा जाता, बल्कि भावना को महत्व दिया जाता है. सभी मिलकर इस सामग्री से मीठा सूजी का हलवा तैयार करते हैं.पहाड़ों की होली का शुभारंभ जितना खास होता है, उसका समापन भी उतना ही भावनात्मक और पवित्र माना जाता है.
लगता है भगवान को भोग
हलवा बनने के बाद सबसे पहले इसे भगवान को भोग लगाया जाता है. मंदिर में पूरे गांव के लोग एकत्र होते हैं और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है कि भगवान को भोग लगाने के बाद ही किसी भी शुभ कार्य की पूर्णता होती है. इसलिए होली के इस मीठे समापन में भी सबसे पहले प्रसाद भगवान को अर्पित किया जाता है. भोग लगाने के बाद यही हलवा पूरे गांव में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष सभी मिलकर इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं. यह सिर्फ मिठाई नहीं होती, बल्कि पूरे गांव की एकता और भाईचारे का प्रतीक होती है. लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर नए साल की शुरुआत करते हैं.
साल भर रहते हैं स्वस्थ
स्थानीय महिला पुष्पा जोशी बताती हैं कि गांव के लोग मानते हैं कि जो भी इस हलवे को भगवान के प्रसाद के रूप में ग्रहण करता है, उसे अच्छा फल मिलता है और वह साल भर स्वस्थ रहता है. यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और हर साल होली के बाद इसी तरह हलवा बनाकर पूरे गांव में बांटा जाता है. इस परंपरा का सबसे सुंदर पक्ष यह है कि इसमें अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता. हर घर से कुछ न कुछ योगदान आता है और सब मिलकर एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं. इससे गांव में आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है. बच्चे भी इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि उन्हें प्रसाद के साथ-साथ सभी से आशीर्वाद भी मिलता है.
इस तरह पहाड़ों में होली का अंत मिठास, भक्ति और एकता के साथ होता है. रंगों की मस्ती के बाद जब हलवे का प्रसाद बांटा जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे त्योहार की थकान भी मिठास में बदल गई हो. यही खास परंपरा पहाड़ों की होली को और भी विशेष बनाती है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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