इसके अलावा जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां सड़क अत्यंत संकरी है और उसी बिंदु पर लगभग 45 डिग्री का अंधा मोड़ मौजूद है। मोड़ पर न तो पर्याप्त संकेतक लगे हैं और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम जिससे हादसे की आशंका पहले से बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वह लंबे समय से इस मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन को अवगत कराते रहे हैं लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। अब इस लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सिस्टम की लाचारी… फर्श पर गद्दे बिछा किया गया घायलों का इलाज
भीषण बस हादसे के बाद जब बड़ी संख्या में घायल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भिकियासैंण पहुंचे, तो अस्पताल की सीमित व्यवस्थाएं भी सामने आ गईं। सीएचसी में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य के कारण वार्ड पूरी तरह तैयार नहीं थे जिससे मजबूरन घायलों का उपचार फर्श पर गद्दे बिछाकर किया गया।
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