अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्रपुरी महाराज ने रामादल को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि रामादल का एक भी सदस्य सिंहस्थ की होने वाली बैठकों में शामिल नहीं हो पाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को सुचारु रखने के लिए सभी निर्णय साधु-संतों की सहमति और राष्ट्रीय नेतृत्व के माध्यम से ही निर्णय लिए जाएंगे। कुल मिलाकर रामादल अखाड़े का सिंहस्थ की तैयारियों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर रोक रहेगी।
मुख्यमंत्री, मेला अधिकारी और कलेक्टर से करेंगे शिकायत
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि जल्द ही इस बात से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उज्जैन कलेक्टर और मेला अधिकारी से चर्चा करेंगे कि सिंहस्थ को लेकर जो भी चर्चा की जाए उसमें सिर्फ और सिर्फ केवल 13 अखाड़ों और राष्ट्रीय नेतृत्व को ही शामिल किया जाए। स्थानीय तौर पर किसी भी संत को सिंहस्थ से जुड़ी जानकारी न दी जाए और न ही उनसे कोई विचार विमर्श किया जाए।
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अखाड़ों की जमीन अपने नाम पर करवाना सरासर गलत, कार्रवाई करवाउंगा
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने एक बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ संप्रदाय के महंतों ने अखाड़े की जमीन अपने निजी नामों से कर ली है, उनकी जांच के लिए जल्द ही पत्र लिखा जाएगा। पुरी महाराज का कहना है कि अखाड़े की जमीन रजिस्टर्ड अखाड़े के नाम से ही होनी चाहिए, न कि किसी निजी महंत के नाम से। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि समय रहते ऐसे लोग अपनी गलती सुधार ले वरना कार्रवाई जरूर की जाएगी।
वैष्णव अखाड़ों ने बनाया रामादल अखाड़ा परिषद
स्थानीय अखाड़ा परिषद से शैव अखाड़ों से जुड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे और परिषद के भंग होने के बाद वैष्णव अखाड़ों ने अपना अलग रामा दल अखाड़ा परिषद नामक संगठन बना लिया है। बीते दिनों मंगलनाथ रोड स्थित श्री पंच रामानंदीय निर्मोही अखाड़े में तीनों वैष्णव अणियों की बैठक में निर्मोही अणि अखाड़ा, दिगंबर अणि अखाड़ा और निर्वाणी अणि अखाड़ा के महंतों और महामंडलेश्वरों ने भाग लिया। जिसमें रामादल अखाड़ा परिषद का गठन किया गया। बैठक में मौजूद संतों ने घोषणा की कि अब सिंहस्थ से जुड़े किसी भी मुद्दे पर वे शासन-प्रशासन से इसी नए संगठन के जरिए बात करेंगे।
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