जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजने की आस अधूरी थी, अब वहां आवाज लौट रही है। जिन मासूम चेहरों पर शब्दों की कमी खामोशी बनकर छाई रहती थी, वे अब ध्वनियों को महसूस कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एम्स बिलासपुर उम्मीद की ऐसी ही नई सुबह लेकर आया है।
संस्थान में अब तक 11 ऐसे बच्चों के सफल कोक्लीयर इम्प्लांट ऑपरेशन हुए हैं, जो जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ थे। अब ये बच्चे न केवल ध्वनियां सुन पा रहे हैं, बल्कि उनके वाक और भाषा विकास भी तेजी से हो रहा है। एम्स में मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में सुनने की अक्षमता की समय पर पहचान और उपचार को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना रहा। कार्यक्रम में ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश कुमार ने इस उपलब्धि को साझा किया।
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