कीट नियंत्रण पर इस ट्रिक से करें देखरेख
पलामू के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि मंजर निकलते ही आम के बागानों में आम की हॉप्पर, मेली बग और थ्रिप्स जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं. ये कीट फूलों का रस चूसते हैं, जिससे मंजर काला पड़ने लगता है और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. ऐसे में अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए. ध्यान रखें कि फूल पूरी तरह खिले हों, तब मधुमक्खियों की सक्रियता को देखते हुए छिड़काव सावधानी से करें. अत्यधिक रासायनिक दवा का उपयोग परागण को प्रभावित कर सकता है.
फफूंद रोग से ऐसे करें बचाव
इस मौसम में पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज जैसे फफूंद रोग आम बागानों में तेजी से फैलते हैं. यदि मंजर पर सफेद चूर्ण या काले धब्बे दिखाई दें तो तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव करें. मौसम में नमी अधिक होने पर रोग का प्रकोप बढ़ता है. इसलिए 10 से 15 दिन के अंतराल पर सुरक्षात्मक स्प्रे करना लाभकारी रहता है. छिड़काव की मात्रा और दवा का चयन कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही करें.
मधुआ का प्रकोप और बचाव के उपाय
आम में मंजर आने के समय मधुआ यानी हॉप्पर का प्रकोप बढ़ जाता है, जो मंजर का रस चूसकर उसे काला कर देता है और फल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो भारी नुकसान हो सकता है. इससे बचाव के लिए अनुशंसित मात्रा में इमीडाक्लोरोपिड का छिड़काव प्रभावी माना जाता है. इसके अलावा एसीफेट आधारित दवा, जिसे बाजार में लेंसर गोल्ड नाम से जाना जाता है. इसका भी उपयोग किया जा सकता है. छिड़काव सुबह या शाम के समय करें और दवा की मात्रा कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही लें, ताकि मंजर सुरक्षित रहे और बेहतर फल सेटिंग हो सके.
हार्मोन प्रबंधन से बढ़ेगी फल सेटिंग
अक्सर मंजर आने के बाद फूल झड़ने की समस्या सामने आती है. ऐसे में प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर या हार्मोन का संतुलित प्रयोग फल सेटिंग बढ़ाने में सहायक होता है. एनएए या अन्य अनुशंसित हार्मोन का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करने से फूलों का झड़ना कम होता है और अधिक फल टिकते हैं. हालांकि मात्रा का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि अधिक डोज नुकसान भी पहुंचा सकती है.
संतुलित पोषण भी है जरूरी
मंजर अवस्था में सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम का फोलियर स्प्रे उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही सिंचाई का संतुलन बनाए रखें, जलभराव से बचें और बाग की साफ-सफाई पर ध्यान दें.
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