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ग्रामीणों ने बताया कि सेहरा टोला के लिए पूर्व में आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया था, लेकिन उसका निर्माण गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर बैगा मोहल्ले में कराया जा रहा था। दूरी अधिक होने के कारण आदिवासी ग्रामीणों और बैगा समाज ने इसका विरोध किया, जिसके बाद विभाग ने स्थान परिवर्तन कर सेहरा टोला में नया भवन बनाने का आश्वासन दिया था। साथ ही नये सिरे से कार्यकर्ता और सहायिका की नियुक्ति की बात भी कही गई थी। हालांकि कई महीने बीत जाने के बावजूद न तो भवन बन सका और न ही नई नियुक्तियां हो पाईं। इसका सीधा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी के माध्यम से मिलने वाला पोषण आहार और महिलाओं को मिलने वाली टीकाकरण सुविधाएं भी नियमित नहीं हो पा रही हैं।
ग्रामीण महिला प्रियंका ने बताया आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। शासन ने जो भवन और स्टाफ देने का वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं हुआ। बच्चों के साथ जानवर बैठ जाते हैं, न देखरेख है न सुविधा। हम कई बार शिकायत कर चुके हैं महिलाओं को टीकाकरण के लिए भी भटकना पड़ता है, केंद्र सिर्फ नाम का चल रहा है सेहरा टोला में ही भवन बने और सही कर्मचारी आएं, यही हमारी मांग है। मामले पर परियोजना अधिकारी आरती यादव ने बताया कि लापरवाही की शिकायत मिलने पर सेक्टर सुपरवाइजर को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं गांव जाकर स्थिति का जायजा लेंगी और सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।
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