केंद्रीय मंत्री ने छात्रावास के शौचालय, रसोईघर और पूरे परिसर का भी बारीकी से निरीक्षण किया। रसोईघर में आवश्यक खाद्य सामग्री जैसे दाल, चावल और आटा का स्टॉक नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। अधिकारियों द्वारा यह सफाई दी गई कि चूहों द्वारा सामग्री खराब कर दिए जाने के कारण राशन को बाहर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, लेकिन मंत्री ने इस तर्क को अस्वीकार्य बताया। निरीक्षण के बाद कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री ने छात्रावासों की बदहाल व्यवस्थाओं पर कड़ा रुख अपनाया।
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कलेक्टर की मौजूदगी में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि इन छात्रावासों में गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनकी देखभाल और सुविधाओं की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन द्वारा छात्रों के लिए पर्याप्त बजट और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, इसके बावजूद लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि छात्रों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।