1000000 का पैकेज ठुकराया
अभिनव बताते हैं कि उन्होंने करीब 14 साल तक कॉरपोरेट इंडस्ट्री में काम किया. मुंबई समेत देश के कई राज्यों में उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम किया और लाखों का पैकेज पाया. करियर के अंतिम दौर में उन्हें करीब 10 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर हुआ, लेकिन उसी समय उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया.
पत्नी ने किया मार्गदर्शन, तब मिली सफलता
अभिनव बताते हैं सब कुछ छोड़कर उन्होंने कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने का फैसला किया. हालांकि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन पत्नी स्नेहा कुमारी के वैज्ञानिक ज्ञान और मार्गदर्शन ने इस फैसले को मजबूती दी. उन्होंने अभिनव को जैविक खाद निर्माण का आइडिया दिया और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर फैक्ट्री शुरू करने की सलाह दी. इसके बाद अभिनव ने पूरी तैयारी के साथ रिलीकम जैविक खाद फैक्ट्री की नींव रखी.
4 राज्यों में होती है जैविक खाद की सप्लाई
आज फैक्ट्री में करीब 200 बेड में जैविक खाद तैयार की जा रही है. जहां हर महीने यहां से 50 से 60 टन जैविक खाद का उत्पादन होता है, जिसकी सप्लाई बिहार के साथ-साथ चार राज्यों तक की जा रही है. महज 3 सालों में इस कारोबार ने बड़ी उड़ान भर ली है. टर्नओवर की बात करें तो सिर्फ 2 साल में 40 लाख रुपये से अधिक का कारोबार हो चुका है.
10-15 लोगों को मिला है रोजगार
इस फैक्ट्री के जरिए अभिनव ने न सिर्फ अपनी पहचान बनाई है. बल्कि 10 से 15 लोगों को स्थायी रोजगार भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि जैविक खेती का भविष्य उज्ज्वल है और किसान अब रासायनिक खाद की जगह जैविक विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं. अभिनव मानते हैं कि अगर सही प्लानिंग, मेहनत और वैज्ञानिक सोच के साथ काम किया जाए, तो गांव में रहकर भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है
अभिनव की यह यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी और व्यवसाय के बीच दुविधा में हैं. आज अभिनव की कहानी यह साबित करती है कि जोखिम लेने का साहस और सही दिशा में मेहनत इंसान की किस्मत बदल सकती है. और जब साथ में जीवनसाथी का सहयोग हो, तो सफलता और भी आसान हो जाती है.
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