पश्चिमी चंपारण जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह होते ही सड़कों पर घना कुहासा छा जा रहा है, जिससे पूरा इलाका धुंध की चादर में लिपटा नजर आता है। दृश्यता कम होने के कारण आम लोगों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ठिठुरन इतनी बढ़ चुकी है कि लोग अलाव और रजाइयों में दुबकने को मजबूर हैं। बेहद जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकलना मुनासिब समझ रहे हैं। ठंड और कोहरे का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड के बीच स्कूली बच्चे किताबें और बैग थामे स्कूल जाने को विवश हैं। कांपते हाथ, सिकुड़ा हुआ शरीर और मासूम चेहरों पर परेशानी साफ झलक रही है। कई स्थानों पर बच्चे स्वेटर, मफलर और टोपी पहनने के बावजूद ठंड से राहत नहीं पा रहे हैं। अभिभावक बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं, लेकिन पाठ्यक्रम और परीक्षा की मजबूरी के कारण उन्हें बच्चों को स्कूल भेजना पड़ रहा है।
यहां SUV कार गड्ढे में गिरी
मुजफ्फरपुर जिले में घने कोहरे का असर अब सड़क हादसों के रूप में सामने आने लगा है। ताजा मामला करजा थाना क्षेत्र के मड़वन-कांटी मुख्य सड़क का है, जहां अहले सुबह तेज रफ्तार एक एसयूवी कार अनियंत्रित होकर सड़क से फिसलते हुए करीब आठ फीट गहरे खड्डे में जा गिरी। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई, हालांकि कार में सवार तीन लोग घायल हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसयूवी कांटी की ओर से मड़वन की तरफ जा रही थी। इसी दौरान घना कोहरा और सड़क का घुमाव चालक को दिखाई नहीं दिया, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ गया और कार सड़क छोड़कर पास के खड्डे में पलट गई। हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही करजा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया। सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस संबंध में करजा थाना प्रभारी रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि अहले सुबह घने कोहरे और तेज रफ्तार के कारण यह दुर्घटना हुई है। इलाके में सड़कें काफी घुमावदार हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को गड्ढे से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है और मामले की जांच की जा रही है।
दिहाड़ी कामगारों की रोजी-रोटी पर भी पड़ा असर
सुबह और शाम के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। बाजार देर से खुल रहे हैं और लोग जल्दी घर लौटने लगे हैं। ठंड का सीधा असर मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों की रोजी-रोटी पर भी पड़ा है। निर्माण कार्य, खेतों में काम और खुले में होने वाले अधिकांश कार्य प्रभावित हो रहे हैं। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूर ठंड से सबसे अधिक परेशान हैं, जिससे उनकी आमदनी पर भी असर पड़ रहा है।
मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही
बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह मौसम और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ऐसे मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। डॉक्टर शंशांक भारद्वाज और ए.के. श्रीवास्तव ने लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, गर्म कपड़े पहनने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
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ठंड और बढ़ सकती है
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। ऐसे में जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों से जरूरतमंदों के लिए अलाव जलाने, कंबल वितरण और अन्य राहत उपाय तेज करने की मांग उठने लगी है। फिलहाल ठंड और कुहासे ने पूरे पश्चिमी चंपारण को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।