छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी के छात्रावास से गया जिले का 19 वर्षीय छात्र रोहित कुमार संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। घटना के करीब दस दिन बीत जाने के बाद भी छात्र का कोई सुराग नहीं मिला है। इससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
5 मार्च से लापता है छात्र
जानकारी के मुताबिक लापता छात्र की पहचान गया जिले के कोंच थाना क्षेत्र निवासी अमरेंद्र कुमार के 19 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार के रूप में हुई है। रोहित छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा स्थित डॉ. सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था और विश्वविद्यालय के छात्रावास में ही रहता था। परिजनों के अनुसार रोहित 5 मार्च 2026 से अचानक लापता है। हालांकि परिवार को इसकी जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने 6 मार्च की रात करीब 10:30 बजे दी। परिजनों का कहना है कि घटना इससे पहले ही हो चुकी थी, लेकिन उन्हें देर से सूचना दी गई।
पांच हजार रुपये के विवाद में हुई थी मारपीट
परिवार जब बिलासपुर पहुंचा और छात्रावास में रोहित के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। परिजनों के मुताबिक रोहित का अपने ही एक सहपाठी पंकज के साथ करीब पांच हजार रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इस विवाद के बाद रोहित के साथ मारपीट भी की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
परिवार को नहीं दिखाई जा रही सीसीटीवी फुटेज
पीड़ित पिता अमरेंद्र कुमार का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन रोहित की उपस्थिति और अनुपस्थिति को लेकर भी साफ जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास और यूनिवर्सिटी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी परिवार को नहीं दिखाई जा रही है। ऐसे में परिजनों को शक है कि कहीं न कहीं इस मामले की सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है।
उपस्थिति रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर का शक
परिजनों ने यह भी संदेह जताया है कि 5 मार्च के उपस्थिति रजिस्टर में रोहित के नाम के सामने किए गए हस्ताक्षर फर्जी हो सकते हैं। इसको लेकर परिवार ने हस्तलेखन की जांच कराने की मांग की है। परिवार ने रोहित के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराने की भी मांग की है। परिजनों का कहना है कि रोहित के मोबाइल फोन से उसकी मां के नाम से कुछ संदिग्ध संदेश भेजे गए थे, जबकि उसकी मां को ऐसे किसी संदेश की जानकारी नहीं है। इससे परिवार को आशंका है कि छात्र के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है।
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ऑनलाइन गेमिंग की भी सामने आई बात
पीड़ित पिता अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जब वे विश्वविद्यालय पहुंचे और बेटे की तलाश शुरू की, तो वहां मौजूद कुछ छात्रों और वार्डेन ने बताया कि रोहित ऑनलाइन गेमिंग में काफी समय बिताता था। हालांकि पिता का कहना है कि इस बात की सच्चाई उन्हें भी पूरी तरह नहीं पता है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।
कई दिनों से अधिकारियों से लगा रहे गुहार
इधर परिवार पिछले कई दिनों से बिलासपुर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर बेटे की तलाश की गुहार लगा रहा है। परिजनों का कहना है कि वे कई बार एसपी और डीएम कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है।
केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग
पीड़ित परिवार ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिवार का कहना है कि जल्द से जल्द इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रोहित को बरामद किया जाए, ताकि परिवार को सच्चाई का पता चल सके।
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